जगन्नाथ पुरी की चाय में घुली मानवता की मिठास : के पी सिंह ठैनुआं
#प्रेरणादायक
"प्रेरणा की एक प्याली – लव जी चाय वाले की सच्ची कहानी"
आज जगन्नाथ पुरी की पावन धरती पर एक अनमोल आत्मा से भेंट हुई — चाय की दुकान चलाने वाले लव जी से।
जब मैं उनकी दुकान पर चाय पीने रुका, तब वे अपने दिव्यांग, अनाथ भांजे सोनू की सेवा में लगे थे। उन्होंने जो कहा, उसने आत्मा को झकझोर दिया —
"सर, मेरे लिए माता-पिता की सेवा ईश्वर की सेवा है, और भांजे की सेवा जगन्नाथ जी की सेवा है। कभी-कभी खुद दो वक्त भूखा रह लेता हूँ, लेकिन सोनू को कभी भूखा नहीं रहने देता। मैंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी, ताकि माँ-बाप की सेवा कर सकूँ।"
लव और कुश – ये नाम हैं दो जुड़वां भाइयों के, जिनमें लव जी सच्चे अर्थों में "रामायण" की मर्यादा और ममता का जीवन्त उदाहरण बन चुके हैं।
आज जब दुनिया धन, पद और प्रतिष्ठा में बड़ा-छोटा मापती है, लव जी जैसे साधारण व्यक्ति अपनी असाधारण सोच और कर्मों से सबको पीछे छोड़ देते हैं।
वृद्धाश्रमों में माँ-बाप को छोड़ आने वालों, और ज़मीन-जायदाद के झगड़ों में भाईचारे को भूल जाने वालों को लव जी से सीखना चाहिए —
सेवा, त्याग और सच्चे प्रेम का अर्थ क्या होता है।
इस छोटी सी मुलाकात में मैंने लव जी को बार-बार आत्मा से नमन किया और ईश्वर से प्रार्थना की —
"हे प्रभु! इनके जीवन में सदैव प्रकाश बना रहे। जो खुद भूखा रहकर किसी और को खिलाए, वो सचमुच इंसान नहीं, साक्षात इंसानियत है।" वह चाहते तो भांजे सोनू को अनाथालय छोड़ सकते थे, लेकिन उन्होंने उसकी सेवा को ईश्वर की सेवा माना। इसलिए कहता हूँ कि सफलता और असफलता हमारे कर्मों में है, लेकिन हम माया के कुजाल में फंसकर इन्सानियत को भूल जाते हैं।
जय जवान जय किसान।
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